Thursday, 12 March 2026

आने वाला है खरमास,बंद होंगे सभी मांगलिक कार्य

आने वाला है खरमास, बंद होंगे सभी मांगलिक कार्य -
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     खरमास को मलिन मास माना जाता है। इस महीने में हिन्दू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और कोई भी धार्मिक संस्कार नहीं होता है।

कब से लग रहा है खरमास :-
2026 में अगला खरमास 15 मार्च 2026 (रविवार) से लग रहा है, जो 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा। इस दौरान सूर्य देव मीन राशि में रहेंगे। बता दें कि 2025 का आखिरी खरमास 16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक था। 

खरमास प्रारम्भ-
शुरुआत: 15 मार्च 2026, देर रात 1:08 बजे (मीन संक्रांति)।
समापन: 14 अप्रैल 2026 (सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ)
हिन्दू धर्म में खरमास के महीने में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं किए जाते। पंचाग की मानें तो जब से सूर्य बृहस्पति राशि धनु और मीन में प्रवेश करता है तभी से खरमास या मलमास प्रारंभ हो जाता है। हिन्दू धर्म में इस महीनें को शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए इस महीने में किसी भी तरह के नए काम या शुभ काम नहीं किए जाते हैं। 

शास्त्रोक्त मान्यता है कि सूर्यदेव की उपासना से यश,कीर्ति, वैभव और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। इसलिए सूर्य उपासना का बड़ा महत्व बताया गया है। खरमास या मलमास सूर्य से संबंधित है इसलिए इन दिनों में सूर्य उपासना के साथ दान, धर्म और उपासना का विशेष महत्व बतलाया गया है ।

खरमास में ना करें ये काम:-

 खरमास में किसी भी तरह का कोई मांगलिक कार्य ना करें। जैसे शादी, सगाई, वधु प्रवेश, द्विरागमन, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का आरंभ आदि ना करें। मांगलिक कार्यों के सिद्ध होने के लिए गुरु का प्रबल होना बहुत जरुरी है। बृहस्पति जीवन के वैवाहिक सुख और संतान देने वाला होता है।खरमास के दौरान, गंगा और गोदावरी के साथ-साथ उत्तर भारत के उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, राज्यों में सभी मांगलिक कार्य व यज्ञ करना निषेध होता है। 
खरमास पर क्या करें:-

खरमास के दिनों में दान पुण्य का विशेष महत्व है इसलिए इन दिनों में किया गया दान का विशेष फल प्राप्त होता है। इसलिए खरमास के दौरान जितना संभव हो सके गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों को दान करें। खरमास में सूर्य आराधना का विशेष महत्व है। इसलिए इन दिनों सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान आदि से निवृत्त होकर सूर्य को अर्घ्य दें और सूर्य आराधना करें । आदित्य हृदय स्त्रोत और सूर्य मंत्रों का जाप करें। गर्मी का दौर प्रारंभ  हो गा  इसलिए गाय को हरा चारा खिलाएं, गौसेवा करे और पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें।अनाथ बच्चों को कुछ दान करें । इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है।
तुलसी पूजा के नियम और सावधानियां:-

खरमास के दौरान तुलसी पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है
तुलसी को सुबह जल अर्पित करना चाहिए और शाम को दीपक जलाना चाहिए।
इस समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।
इस दौरान तुलसी पर सिंदूर या सुहाग सामग्री चढ़ाने से बचें।
तुलसी के आसपास स्वच्छता बनाए रखें और प्रतिदिन उसकी आरती करें।
खरमास में तुलसी पूजा का महत्व:-

तुलसी में प्रतिदिन जल चढ़ाना और दीपक जलाना शुभ होता है। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं और सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि तुलसी पूजन से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं।